Sunday, April 1, 2012

कर कँगना

                         कर कँगना
ओ प्यारी बहना
तुमसे कुछ कहना

तुम कोमल टहनी
पैजनियाँ पहनी
डगमग हो पैया
मैं थामूं बहियाँ
             सँभल सँभल चलना
             डग आगे धरना
पैजनियाँ छम छम
गम भागे गम गम
जन परिजन हेरें
चुटकी  दें टेरे
            नाचे घर अँगना
            बजे कर कँगना
[भोपाल:२४.०३.२०१२]                                                    

Friday, March 9, 2012

घर आँगन की किलकारी

                 घर आँगन की किलकारी
पीट रहीं हैं दादी नानी
चारों ओर ढिंढोरा
घर आँगन की है किलकारी
सोनीरा सोनीरा !

आओ सखी सहेली देखो
उड़नपरी सोनीरा
ऐसा लगता घर आँगन में
जैसे हुआ सवेरा
आनन् फानन अनुगूंजों ने
सबका सार बटोरा...

भनक पडी जब छै ऋतुओं के
कुसुम  कली    सोनीरा
चमक पड़े ममता से आनन्
जैसे चमके हीरा
ताली बजा कर नाँची
बजे ढोल मजीरा ...

क्षिति जल पावक गगन समीरा
बोले सुन सोनीरा.
चिंता मत करना दादी
नानी की सोनीरा
भर  देंगे हम आशीषों से
छूछा धरा कटोरा ...
[सैंट जॉन :कनाडा :२२.१२.२००२]

Friday, January 27, 2012

                    डोळारामा डोळारामा !
 बुला रहा है डोळारामा
बेचे नहीं सिला पजामा
छोटी मोटी सब चीजों का
बड़ा खज़ाना डोळारामा

खेल खिलौना बाँलीबाल
सस्ता सुन्दर बढ़िया माल
जी करता सब कुछ ले लूं
बच्चों में बाटूँ तत्काल

डोळारामा डोळारामा
बेचे सब कुछ सस्ते दामा
नाचता है सबके अधरों पर
डोळारामा डोळारामा

कपड़ा कपड़ा कपड़ा कपड़ा
जितना चाहो लेलो कपड़ा
एक से एक है कपड़ा बढ़िया
मोल भाव का यहाँ न लफड़ा
[सैंट जॉन कनाडा :१०.१२.२०१२]

Wednesday, January 25, 2012

मत रो मेरी गुइयाँ !

                                    मत रो मेरी गुइयाँ !
                 चलना सीख रही सोनीरा
                 घर आँगन  की गलियां
सिखा रहे हैं मम्मी पापा
थामें    दोनों       बहियाँ
 आगे बढ़ने की कोशिश में
 डगमग डगमग पैयां  
              जल्दी जल्दी आगे आओ  
              बुला रहीं हैं सखियाँ 
बाज  रहीं हैं छम छम छम छम
पग पग पर पैजनियाँ
पूसी लूसी लगीं खेलने
झटपट छूँछ बिलैयाँ          
            मन हीं मन खुश मम्मी पापा
            लेते ढेर वलैयाँ
मुँह के बल गिर गयी  अचानक
छूटीं दोनों बहियाँ
झटपट मम्मी लगी चुपाने
लेकर अपनी कनियाँ
            दौडीं दौडीं सखियाँ आईं
            मत रो मेरी गुइयाँ
[लोस एंजिलीस :अमरीका :२१.०१.२०१२]   

Wednesday, December 28, 2011

करना इसकी खोज!

करना  इसकी खोज!

मेली प्याली दादी माँ
मालिछ करती रोज़
मेले तन मन में भल जाता
नया नया नित  ओज
मालिछ कलके नहलाती
मेली दादी रोज़
बिन नागा के नहलाना
लगे न उनको बोझ
नहला पहला कल कपड़े
देतीं दादा गोद
खुछ होतीं हैं वे कितनी
करना इछ्की खोज !
[सैंट जॉन :कनाडा :०९.१२.२०११]       

पापड़ बेले हैं !



जाने कितने रामलाल ने
सचमुच
पापड़ बेले हैं
बचपन में
आँसू ने बह बह
गहरा सागर रूप धरा
हुई नसीब न
दूध बूँद की
पानी पी पेट भरा
समय समाज कर्ज के ढेरों
हरदिन
झापड़ झेले हैं
बेचारी
अम्मा ने भेजा
ढोर चराने जंगल में
काले आखर भैंस बराबर
खूब रमा मन दंगल में
दाँव -पेंच के उस्तादों से
अनगिन
मन्त्र सीखे हैं
घर आँगन
खलिहान खेत के
सिर पर भारी क़र्ज़ लदा
रामलाल ने
होश सभाला
रहता हैं ग़मगीन सदा
सिर को
झंझट घेरे हैं
[भोपाल:३०.०८.०७]
:

Tuesday, November 29, 2011

यदि मैं हाथी होता !
घोड़ा बंदर रीछ होता
यदि मैं सचमुच हाथी होता
दौड़ा दौड़ा जयपुर जाता
संगी साथी सब ले जाता
होली वहां मनाता
रंग गुलाल उड़ाता
जगर मगर परिधान पहनता
पहला नम्बर मुझको मिलता
पायल/घुंघरू पाँव बाँधता
कभी नाचा ऐसा नचता
सबका जी बहलाता
करतब अजब दिखाता
[फ्रिदिरिक्तन
काम इनाम
काम काम ,बस ,काम
जो करता है काम
मिलता उसे इनाम
नाम नाम बीएसननाम
करे kk