भीगी बिल्ली दादा जी तबियत के अक्खड़ जब बोलेन तब तोड़ें लक्कड़ पर नातिन की अमृत वाणी सुनते ही हों पानी पानी नातिन कहती बनते घोड़ा बरसाती फिर फटाफट कोड़ा झटपट झटपट पहुंचें दिल्ली बन जाते फिर भीगी बिल्ली हाथ न आये जूता जूता तो बस जूता कर बैठे जब खूता विश्वयुद्ध हो अगला समझो उसे न पगला नाक कान जब काटे दुश्मन छक्के छूटे चुपके से घर आये कोने में छिप जाये ढूढें सब जब जूता हाथ न आये जूता [सैंट जॉन :कनाडा :२१.१० २०११]